प्रणब बर्धन · कृष्णा भारद्वाज · ए.के. दासगुप्ता · अशोक मित्र · मैल्कम एडीसेशिया · वी.जी. काले
प्रणब बर्धन · कृष्णा भारद्वाज · ए.के. दासगुप्ता · अशोक मित्र · मैल्कम एडीसेशिया · वी.जी. काले
विस्तृत विश्लेषण – जन्म से लेकर प्रसिद्ध सिद्धांत, पुस्तकें, पुरस्कार एवं आलोचनाएँ (परीक्षोपयोगी)
प्रणब बर्धन (Pranab Bardhan)
जन्म-मृत्यु: 1939-जीवित
शिक्षा: B.A. प्रेसीडेंसी कॉलेज, कोलकाता (1958); M.A. कलकत्ता विश्वविद्यालय (1960); Ph.D. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (1966)
प्रसिद्धि: विकास अर्थशास्त्री, भ्रष्टाचार मॉडल, संस्थागत अर्थशास्त्र
मुख्य सिद्धांत
भ्रष्टाचार का "Principal-Agent Model" – भ्रष्टाचार को एक "प्रिंसिपल-एजेंट" समस्या के रूप में समझाया। उनके अनुसार, भारत में तीन प्रभुत्वशाली वर्ग हैं: औद्योगिक पूंजीपति वर्ग, समृद्ध किसान, और सार्वजनिक क्षेत्र के पेशेवर – ये तीनों नीति निर्माण को प्रभावित करते हैं और आपस में सौदेबाजी करते हैं।
पुस्तकें
| पुस्तक का नाम | वर्ष | विवरण |
|---|---|---|
| Land, Labor, and Rural Poverty | 1984 | ग्रामीण गरीबी, भूमि और श्रम का विश्लेषण |
| The Political Economy of Development in India | 1984 (पहला संस्करण), 1998 (दूसरा) | उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक, भारत के विकास की राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर |
| The Economic Theory of Agrarian Institutions | 1989 | कृषि संस्थाओं का आर्थिक सिद्धांत |
| Scarcity, Conflicts, and Cooperation | 2005 | विकास की राजनीतिक और संस्थागत अर्थव्यवस्था पर निबंध |
| Awakening Giants, Feet of Clay | 2013 | चीन और भारत के आर्थिक उदय का तुलनात्मक अध्ययन |
| Smriti Kanduyan (संस्मरण) | 2014 | बंगाली भाषा में आत्मकथा |
भूमिका और योगदान
- बर्कले विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एमेरिटस (1977 से)
- जर्नल ऑफ डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स के मुख्य संपादक (1985-2003)
- MacArthur Foundation के Inequality and Economic Performance नेटवर्क के सह-अध्यक्ष (1996-2007)
- प्रतिष्ठित फुलब्राइट सिएना चेयर (2008-09)
- LSE में BP सेंटेनियल प्रोफेसर (2010-11)
समर्थन करने वाले
- अमर्त्य सेन – उनके साथ सहयोग और विचारों का सम्मान
- यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले – लंबे समय तक संकाय सदस्य
- जेम्स मीड (नोबेल पुरस्कार विजेता) – उनके Ph.D. सुपरवाइजर
आलोचना करने वाले
- नव-शास्त्रीय अर्थशास्त्री – संस्थागत अर्थशास्त्र पर अत्यधिक जोर देने की आलोचना
- मार्क्सवादी अर्थशास्त्री – भ्रष्टाचार मॉडल को "बुर्जुआ" बताते हैं
पुरस्कार
- महालनोबिस गोल्ड मेडल (इंडियन इकोनोमेट्रिक सोसाइटी) 1980
- Guggenheim Fellowship 1981
- पद्म भूषण 2015
कृष्णा भारद्वाज (Krishna Bharadwaj)
जन्म-मृत्यु: 1935-1992
प्रसिद्धि: शास्त्रीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था, मार्क्सवादी अर्थशास्त्र
मुख्य सिद्धांत
शास्त्रीय मूल्य और वितरण सिद्धांत का पुनर्मूल्यांकन। पीरो स्लाफ्फा के विचारों से प्रभावित होकर, उन्होंने शास्त्रीय अर्थशास्त्र को आधुनिक संदर्भ में पुनः प्रस्तुत किया।
पुस्तकें
| पुस्तक का नाम | वर्ष | विवरण |
|---|---|---|
| Production, Exchange and Development | 1978 | उत्पादन, विनिमय और विकास पर निबंध |
| Themes in Value and Distribution | 1989 | मूल्य और वितरण के शास्त्रीय सिद्धांतों का पुनर्मूल्यांकन |
| Accumulation, Exchange and Development | 1994 | संचय, विनिमय और विकास |
भूमिका और योगदान
- JNU में सेंटर फॉर इकोनॉमिक स्टडीज एंड प्लानिंग (CESP) की संस्थापक
- रोम विश्वविद्यालय और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रतिष्ठित प्रोफेसर
- पीरो स्लाफ्फा के साथ कार्य किया
पुरस्कार
- पद्म श्री 1985
- रॉयल इकोनॉमिक सोसाइटी की फेलो
ए.के. दासगुप्ता (Amiya Kumar Dasgupta)
जन्म-मृत्यु: 1922-2005
प्रसिद्धि: आर्थिक विचारधारा का इतिहास, विकास अर्थशास्त्र, मौद्रिक सिद्धांत
मुख्य सिद्धांत
कीनेशियन अर्थशास्त्र और अविकसित देशों के संबंध पर महत्वपूर्ण कार्य। "अविकसित देशों में कीनेशियन नीतियां कैसे काम करती हैं" – उनका मुख्य शोध क्षेत्र।
पुस्तकें
| पुस्तक का नाम | वर्ष | विवरण |
|---|---|---|
| A History of Economic Thought | 1950 | आर्थिक विचारधारा का इतिहास – इस क्षेत्र की सबसे प्रसिद्ध पुस्तक |
| Keynesian Economics and Underdeveloped Countries | 1954 | अविकसित देशों में कीनेशियन अर्थशास्त्र पर मौलिक कार्य |
| The Theory of Economic Growth | 1969 | आर्थिक विकास का सिद्धांत |
भूमिका और योगदान
- दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (DSE) में प्रोफेसर (1950-1970) – संकाय की पहली पीढ़ी के सदस्य
- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कुलपति
- फेलो ऑफ द ब्रिटिश अकादमी
अशोक मित्र (Ashok Mitra)
जन्म-मृत्यु: 1928-2018
प्रसिद्धि: मार्क्सवादी अर्थशास्त्री, "केरल मॉडल" के आलोचक
मुख्य सिद्धांत
मार्क्सवादी अर्थशास्त्र और मूल्य वृद्धि (Inflation) के कारणों पर गहन अध्ययन। केरल के विकास मॉडल की आलोचना के लिए प्रसिद्ध।
पुस्तकें
| पुस्तक का नाम | वर्ष | विवरण |
|---|---|---|
| Kerala's Economic Development: A Critical Review | – | "केरल मॉडल" की आलोचना |
| The Financial and Non-Financial Causes of Price Rise | 1974 | मूल्य वृद्धि के वित्तीय और गैर-वित्तीय कारण |
भूमिका और योगदान
- भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) (1970-1972)
- पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री (1977-1987)
- योजना आयोग के सदस्य
- राज्यसभा सदस्य (1993-1999)
- साहित्य अकादमी पुरस्कार (1996) – बंगाली साहित्य में योगदान के लिए
समर्थन करने वाले
- वाम मोर्चा सरकार – उनकी आर्थिक नीतियों का समर्थन किया
आलोचना करने वाले
- नव-शास्त्रीय अर्थशास्त्री – मार्क्सवादी दृष्टिकोण की आलोचना
- उदारवादी अर्थशास्त्री – राज्य के अत्यधिक हस्तक्षेप को अनुचित बताया
मैल्कम एडीसेशिया (Malcolm Adiseshiah)
जन्म-मृत्यु: 1910-2001
प्रसिद्धि: विकास अर्थशास्त्री, UNESCO में योगदान, शिक्षा अर्थशास्त्री
मुख्य सिद्धांत
शिक्षा और विकास के बीच संबंध पर गहन कार्य। "विकास के लिए शिक्षा एक आवश्यक निवेश है" – उनका मुख्य संदेश।
पुस्तकें
| पुस्तक का नाम | वर्ष | विवरण |
|---|---|---|
| Economic Development of India | 1960 | भारत के आर्थिक विकास का विश्लेषण |
| The Economics of Education | 1969 | शिक्षा अर्थशास्त्र पर मौलिक कार्य |
भूमिका और योगदान
- UNESCO में उप-महानिदेशक (1954-1970) – सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले उप-महानिदेशक
- भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA)
- मैड्रास इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (MIDS) के संस्थापक
पुरस्कार
- पद्म विभूषण
वी.जी. काले (V. G. Kale)
जन्म-मृत्यु: उपलब्ध नहीं
प्रसिद्धि: स्वतंत्रता-पूर्व विकास अर्थशास्त्री
मुख्य सिद्धांत
स्वतंत्रता-पूर्व भारत की आर्थिक नीतियों का विश्लेषण। बॉम्बे योजना, पीपुल्स प्लान, गांधीवादी योजना पर गहन अध्ययन।
भूमिका और योगदान
- गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (GIPE), पुणे से जुड़े
- उनके शोध ने बाद के योजनाकारों (के.एन. राज, डी.आर. गाडगिल) को प्रभावित किया
- "भारतीय अर्थशास्त्र के इतिहास" के महत्वपूर्ण स्रोतों में योगदान
✨ अतिरिक्त महत्वपूर्ण बातें (परीक्षा के लिए)
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| भ्रष्टाचार का Principal-Agent Model | प्रणब बर्धन ने दिया |
| JNU अर्थशास्त्र विभाग की संस्थापक | कृष्णा भारद्वाज |
| UNESCO में सबसे लंबा कार्यकाल | मैल्कम एडीसेशिया (16 वर्ष) |
| केरल मॉडल के आलोचक | अशोक मित्र |
| पहली भारतीय महिला पद्म श्री प्राप्तकर्ता (अर्थशास्त्र में) | कृष्णा भारद्वाज (1985) |
| "शास्त्रीय अर्थशास्त्र का पुनर्जागरण" | कृष्णा भारद्वाज का योगदान |
🎯 एक लाइन सारांश
"प्रणब बर्धन ने भ्रष्टाचार का मॉडल रचा, कृष्णा भारद्वाज ने शास्त्रीय अर्थशास्त्र को जगाया, दासगुप्ता ने आर्थिक विचारधारा का इतिहास लिखा, अशोक मित्र ने केरल मॉडल की परतें खोलीं, एडीसेशिया ने UNESCO में भारत का नाम रोशन किया, और वी.जी. काले ने स्वतंत्रता-पूर्व भारत की आर्थिक नींव को समझा।"
"प्रणब बर्धन ने भ्रष्टाचार का मॉडल रचा, कृष्णा भारद्वाज ने शास्त्रीय अर्थशास्त्र को जगाया, दासगुप्ता ने आर्थिक विचारधारा का इतिहास लिखा, अशोक मित्र ने केरल मॉडल की परतें खोलीं, एडीसेशिया ने UNESCO में भारत का नाम रोशन किया, और वी.जी. काले ने स्वतंत्रता-पूर्व भारत की आर्थिक नींव को समझा।"
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