बर्ट्रांड, स्टैकेलबर्ग एवं स्वीज़ी
📘 अल्पाधिकार सिद्धांत : बर्ट्रांड, स्टैकेलबर्ग एवं स्वीज़ी
📌 2. जोसेफ बर्ट्रांड (Joseph Bertrand) – 1883
परिचय: फ्रांसीसी गणितज्ञ और अर्थशास्त्री। उन्होंने कूरनो के मॉडल की समीक्षा करते हुए अपना वैकल्पिक मॉडल प्रस्तावित किया।
सिद्धांत: बर्ट्रांड द्विसताकार मॉडल (Bertrand Duopoly Model) – कीमत (Price) पर प्रतिस्पर्धा।
पुस्तक: "Book Review of Cournot's Researches" (Journal des Savants, 1883) – यह एक समीक्षा लेख था, पुस्तक नहीं।
वर्ष: 1883।
📌 मुख्य मान्यताएँ (Assumptions)
- दो फर्में समरूप (homogeneous) उत्पाद बनाती हैं।
- वे कीमत (Price) पर प्रतिस्पर्धा करती हैं – प्रतिद्वंद्वी की कीमत को स्थिर मानती हैं।
- उत्पादन की कोई सीमा नहीं (unlimited capacity)।
- फर्में एक ही समय में कीमत तय करती हैं।
- उपभोक्ता सबसे सस्ती फर्म से खरीदते हैं (पूर्ण सूचना)।
- सीमांत लागत स्थिर और समान (constant & identical MC)।
📌 मुख्य निष्कर्ष (Conclusions)
- बर्ट्रांड विरोधाभास (Bertrand Paradox): यदि फर्में समरूप उत्पाद बनाती हैं और MC = c है, तो एकमात्र नैश संतुलन \( P_1 = P_2 = c \) (प्रतिस्पर्धी कीमत) पर होता है।
- इस कीमत पर दोनों फर्मों का लाभ शून्य होता है।
- यदि एक फर्म c से अधिक कीमत लगाती है, तो दूसरी उससे थोड़ा कम लगाकर पूरा बाजार हथिया लेगी।
- यदि दोनों c पर हैं, तो कोई भी कीमत बढ़ाकर लाभ नहीं कमा सकता (ग्राहक खो देगा)।
- निष्कर्ष: दो फर्में भी पूर्ण प्रतिस्पर्धा जैसा परिणाम दे सकती हैं – यह आश्चर्यजनक है।
📌 आगे बढ़ाने वाले
· फ्रांसिस एजवर्थ (Edgeworth): सीमित क्षमता वाला बर्ट्रांड मॉडल (तब कीमत स्थिर नहीं रहती)।
· जीन टिरोल (Jean Tirole): विभेदित उत्पादों के लिए बर्ट्रांड मॉडल का विस्तार।
📌 आलोचना
- कूरनो (Cournot): बर्ट्रांड ने उत्पादन क्षमता की सीमा को नजरअंदाज किया – व्यवहार में फर्में असीमित मात्रा नहीं बेच सकतीं।
- एजवर्थ (Edgeworth): यदि क्षमता सीमित है, तो बर्ट्रांड संतुलन टूट जाता है।
- स्वीज़ी (Sweezy): यह मॉडल वास्तविक दुनिया में लागू नहीं जहाँ उत्पाद विभेदित होते हैं।
📌 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
✔ ट्रिक: "Bertrand → Price" (दोनों B से, लेकिन P से याद रखें – B for Bertrand, P for Price)।
✔ PYQ (UGC-NET): "बर्ट्रांड विरोधाभास क्या है?" → उत्तर: यहां तक कि दो फर्में भी पूर्ण प्रतिस्पर्धी कीमत पर लाभ शून्य कर देती हैं।
✔ मिलान (Match): Cournot → मात्रा प्रतिस्पर्धा, Bertrand → कीमत प्रतिस्पर्धा, Stackelberg → क्रमिक निर्णय।
✔ Assertion (A): बर्ट्रांड मॉडल में फर्में लाभ अर्जित नहीं करतीं। Reason (R): क्योंकि वे कीमत पर प्रतिस्पर्धा करती हैं और नीचे की ओर दौड़ लगाती हैं (race to the bottom) → दोनों सही, R, A की सही व्याख्या।
📌 सूत्र (Formulas)
\( \text{विभेदित उत्पाद} \; \Rightarrow \; P > c \) (धनात्मक लाभ)
📌 संख्यात्मक प्रश्न (Numerical)
प्रश्न 1 (Basic – समरूप उत्पाद): बाजार मांग \( P = 100 - Q \), दोनों फर्मों की MC = 20। बर्ट्रांड संतुलन ज्ञात करें।
उत्तर: \( P = 20,\; q_1 = q_2 = 40,\; \pi = 0 \)।
प्रश्न 2 (Advanced – असमान लागत): MC₁ = 20, MC₂ = 30, मांग \( P = 100 - Q \), बर्ट्रांड संतुलन ?
उत्तर: \( P=29,\; q_1=71,\; q_2=0,\; \pi_1=639,\; \pi_2=0 \)।
प्रश्न 3 (Variant – विभेदित उत्पाद): मांग: \( q_1 = 100 - 2p_1 + p_2,\; q_2 = 100 - 2p_2 + p_1 \), MC = 10। बर्ट्रांड संतुलन ज्ञात करें।
📌 5 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य
- बर्ट्रांड विरोधाभास का समाधान: (i) उत्पाद विभेदन, (ii) क्षमता सीमाएँ, (iii) बहु-अवधि (repeated games) में मिलीभगत संभव।
- बर्ट्रांड बनाम कूरनो: कूरनो में प्रतिस्पर्धा नरम (लाभ धनात्मक), बर्ट्रांड में कठोर (लाभ शून्य)।
- प्रतिक्रिया फलन का ढलान: बर्ट्रांड में प्रतिक्रिया फलन धनात्मक ढलान (रणनीतिक पूरक – strategic complements)।
- एजवर्थ का समाधान: क्षमता सीमाओं के कारण कीमतें चक्रीय होती हैं (price cycles)।
- वास्तविक दुनिया: रेलवे, एयरलाइन, टेलीकॉम जैसे उद्योगों में बर्ट्रांड प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है।
📌 3. हेनरिक वॉन स्टैकेलबर्ग (Heinrich von Stackelberg) – 1934
परिचय: जर्मन अर्थशास्त्री, क्रमिक निर्णय (sequential decision) का मॉडल देने वाले पहले विद्वान।
सिद्धांत: स्टैकेलबर्ग द्विसताकार मॉडल (Stackelberg Duopoly Model) – नेता-अनुयायी (Leader-Follower) मॉडल।
पुस्तक: "Marktform und Gleichgewicht" (Market Structure and Equilibrium) – 1934।
वर्ष: 1934।
📌 मुख्य मान्यताएँ
- दो फर्में समरूप उत्पाद बनाती हैं।
- एक फर्म नेता (Leader) (पहले मात्रा तय करती है), दूसरी अनुयायी (Follower) (नेता की मात्रा देखकर अपनी तय करती है)।
- अनुयायी कूरनो प्रतिक्रिया फलन का पालन करता है।
- नेता अनुयायी के प्रतिक्रिया फलन को जानता है (perfect information)।
- प्रवेश बाधित, सीमांत लागत स्थिर एवं समान।
📌 मुख्य निष्कर्ष
- नेता को पहले चलने का लाभ (first-mover advantage) मिलता है – अधिक उत्पादन और अधिक लाभ।
- मानक मॉडल \( P = a - bQ,\; MC = c \): अनुयायी \( q_F = \frac{a-c}{4b} \), नेता \( q_L = \frac{a-c}{2b} \), कुल \( Q = \frac{3(a-c)}{4b} \), कीमत \( P = \frac{a+3c}{4} \).
- कुल उत्पादन कूरनो से अधिक, प्रतिस्पर्धा से कम।
- यदि दोनों नेता बनने की कोशिश करें → युद्ध व कीमत MC पर।
- यदि दोनों अनुयायी बनें → कूरनो संतुलन।
📌 आलोचना एवं आगे बढ़ाने वाले
आगे: जेम्स फ्रीडमैन (सुपरगेम), फुडेनबर्ग-टिरोल।
आलोचना: नेता द्वारा प्रतिक्रिया फलन का पूर्ण ज्ञान अवास्तविक; चेम्बरलिन: सहयोग बेहतर।
📌 परीक्षा तथ्य
✔ ट्रिक: "Stackelberg → Sequential (S से S)"।
✔ PYQ: नेता को first-mover advantage क्यों? → पहले चलने का लाभ।
✔ तुलना तालिका (महत्वपूर्ण):
| मॉडल | प्रतिस्पर्धा आधार | निर्णय क्रम | नेता का लाभ | कीमत स्तर |
|---|---|---|---|---|
| कूरनो | मात्रा | एक साथ | नहीं | मध्यम |
| बर्ट्रांड | कीमत | एक साथ | नहीं (शून्य लाभ) | न्यूनतम |
| स्टैकेलबर्ग | मात्रा | क्रमिक | हाँ (अधिकतम) | मध्यम-निम्न |
📌 सूत्र (स्टैकेलबर्ग)
📌 संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1: \( P = 200 - Q,\; MC = 20 \). स्टैकेलबर्ग में नेता-अनुयायी आउटपुट, कीमत, लाभ ज्ञात करें।
प्रश्न 2 (असमान लागत): \( P = 100 - Q,\; MC_L=10,\; MC_F=30 \) → \( q_F = 35 - q_L/2 \) → \( q_L = 55,\; q_F = 7.5,\; P=37.5 \)।
प्रश्न 3 (Conceptual): समान MC पर स्टैकेलबर्ग, कूरनो से 12.5% अधिक उत्पादन करता है।
📌 5 अतिरिक्त तथ्य
- प्रथम-चालक लाभ: समान लागत पर नेता अनुयायी से दोगुना उत्पादन व लाभ।
- द्वितीय-चालक लाभ तब जब उत्पाद विभेदित हों और कीमत पर प्रतिस्पर्धा।
- स्टैकेलबर्ग में विलय से एकाधिकार लाभ।
- असममित लागत से अनुयायी बाजार से बाहर हो सकता है।
- उल्टा स्टैकेलबर्ग (कीमत नेतृत्व) भिन्न परिणाम देता है।
📌 4. पॉल स्वीज़ी (Paul Sweezy) – 1939
परिचय: अमेरिकी मार्क्सवादी अर्थशास्त्री, हार्वर्ड प्रोफेसर।
सिद्धांत: टेढ़ी मांग वक्र (Kinked Demand Curve) – अल्पाधिकार में कीमत स्थिरता की व्याख्या।
पुस्तक/लेख: "Demand Under Conditions of Oligopoly" (JPE, 1939), PhD थीसिस।
वर्ष: 1939।
📌 मुख्य मान्यताएँ
- बाजार में कुछ ही फर्में (अल्पाधिकार)।
- यदि मैं कीमत घटाऊँ → दूसरे भी घटाते हैं।
- यदि मैं कीमत बढ़ाऊँ → दूसरे नहीं बढ़ाते।
- मांग वक्र में 'टेढ़' (kink): ऊपर लोचदार, नीचे बेलोचदार।
- सीमांत राजस्व (MR) में ऊर्ध्वाधर अंतराल।
📌 निष्कर्ष
- मांग वक्र टेढ़ा: कीमत बढ़ाने पर मांग अत्यधिक लोचदार, घटाने पर बेलोचदार।
- MR वक्र में discontinuity (ऊर्ध्वाधर अंतराल)।
- कीमत स्थिरता (Price Rigidity): जब तक MC, MR के ऊर्ध्वाधर भाग में रहे, कीमत अपरिवर्तित।
- बताता है कि अल्पाधिकार में कीमतें क्यों चिपकी रहती हैं।
📌 आलोचना
- स्टिग्लर: असममित धारणा का कोई ठोस तर्क नहीं।
- फ्रीडमैन: यह एक व्यवहारिक परिकल्पना (ad hoc) मात्र।
- चेम्बरलिन: कीमत निर्धारण की उत्पत्ति नहीं बताता, केवल स्थिरता।
- एम्पिरिकल साक्ष्य सीमित।
📌 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
✔ ट्रिक: "Kinked Demand Curve → कोना (kink) → कीमत अटकी रहेगी"।
✔ PYQ: टेढ़ी मांग वक्र किस बाजार संरचना की व्याख्या करता है? → अल्पाधिकार (Oligopoly)।
✔ Assertion: MR में ऊर्ध्वाधर अंतराल क्यों? → क्योंकि मांग वक्र में टेढ़ (kink) होता है।
📌 सांख्यिकीय उदाहरण (ग्राफिकल)
प्रश्न 1: मांग: \( P \ge 10 \) पर \( Q = 100-5P \), \( P \le 10 \) पर \( Q = 140-9P \), kink \( P=10 \). MR में अंतराल ज्ञात करें।
प्रश्न 2: यदि MC = 3 या 4 हो, तो कीमत बदलेगी? (MR gap [0, 4.44]) → MC=3 या 4 अंतराल के अंदर → कीमत स्थिर (\(P=10\))।
📌 5 अतिरिक्त तथ्य
- मूल्य युद्ध (Price War) की व्याख्या नहीं करता।
- केवल उन उद्योगों में लागू जहाँ फर्में एक-दूसरे की कीमतों पर नज़र रखती हैं।
- स्टिग्लर का विकल्प: मिलीभगत (tacit collusion) से भी कीमत स्थिरता।
- मौसमी कीमतों या नए प्रवेश का प्रभाव नहीं दिखाता।
- बीसवीं सदी के मध्य का महत्वपूर्ण व्यवहारवादी मॉडल।
⚡ एक नज़र में तुलना (मॉडल सारांश)
| मॉडल | प्रतिस्पर्धा चर | समय/क्रम | संतुलन लाभ | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| बर्ट्रांड | कीमत (Price) | एकसाथ | शून्य (समरूप उत्पाद) | विरोधाभास, कीमत = MC |
| स्टैकेलबर्ग | मात्रा | क्रमिक (नेता-अनुयायी) | धनात्मक (नेता > अनुयायी) | प्रथम-चालक लाभ |
| स्वीज़ी | कीमत (स्थिरता) | प्रतिक्रिया असममित | धनात्मक सीमा में | टेढ़ा मांग वक्र, मूल्य कठोरता |
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