आधुनिक आर्थिक सुधारक एवं अग्रणी अर्थशास्त्री

आधुनिक आर्थिक सुधारक एवं अग्रणी अर्थशास्त्री | पूरा विश्लेषण

आधुनिक आर्थिक सुधारक एवं अग्रणी अर्थशास्त्री
(पूरा विश्लेषण)

📊 1991 के सुधारों से नीति आयोग तक — सात महान हस्तियों का सम्पूर्ण अध्ययन
25. मनमोहन सिंह (1932-2024)
"1991 आर्थिक सुधारों के जनक"
पूरा नाम
मनमोहन सिंह (Manmohan Singh)
उपनाम
"भारतीय आर्थिक उदारीकरण के जनक" (Father of Indian Economic Liberalisation)
प्रमुख योगदान
1991 के आर्थिक सुधारों की रूपरेखा – जब भारत दिवालिया होने के कगार पर था, तब उन्होंने अर्थव्यवस्था को खोलने का साहसिक कदम उठाया
🔧 मुख्य सुधार (Finance Minister 1991-96 के दौरान):
सुधारवर्षविवरण
रुपये का अवमूल्यन (Devaluation)1991दो चरणों में रुपये का मूल्य घटाया गया
औद्योगिक डीलाइसेंसिंग1991MRTP Act की कई धाराओं को हटाया, कंपनियों को विस्तार की स्वतंत्रता
LERMS (द्वैध विनिमय दर प्रणाली)1992-93बाजार-निर्धारित विनिमय दर की ओर पहला कदम
एकीकृत विनिमय दर1993पूर्ण रूप से बाजार-निर्धारित दर
चालू खाता परिवर्तनीयता1994रुपया चालू खाते में पूर्ण रूप से परिवर्तनीय बना
निजी बैंकों को लाइसेंस1993RBI ने 10 निजी बैंकों को लाइसेंस जारी किए
🤝 किसने साथ दिया?
• पी.वी. नरसिंह राव (तत्कालीन प्रधानमंत्री) – उन्हें पूरा राजनीतिक समर्थन दिया
• सी. रंगराजन (RBI गवर्नर, 1992-97) – मौद्रिक सुधारों में महत्वपूर्ण साझेदारी
• राजा चेलैया – कर सुधार समिति के अध्यक्ष
• डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा था: "No power on earth can stop an idea whose time has come"
⚡ किसने आलोचना की?
• वामपंथी दल और उद्योगपति – कुछ उद्योगपति सुरक्षित बाजार खोने से डर रहे थे
• कुछ अर्थशास्त्री – कहते हैं कि सुधार अपर्याप्त थे और सामाजिक क्षेत्र की उपेक्षा हुई
🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
1. प्रधानमंत्री के रूप में दो कार्यकाल (2004-2014) – पहले सिख प्रधानमंत्री
2. प्रमुख योजनाएँ (PM कार्यकाल): MGNREGA (2005), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (2013), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का विस्तार, भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौता (2008)
3. शैक्षणिक योगदान: D.Phil (Oxford) – अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट, पुस्तक "India's Export Trends and Prospects for Self-Sustained Growth", दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में प्रोफेसर
4. पुरस्कार: पद्म विभूषण (1987), बैंक ऑफ इंग्लैंड गवर्नर्स अवार्ड
5. RBI गवर्नर (1982-1985) – जाने से पहले RBI के गवर्नर भी रहे
26. राजा चेलैया (1922-2009)
"कर सुधार समिति के अध्यक्ष"
पूरा नाम
राजा जे. चेलैया (Raja J. Chelliah)
प्रमुख योगदान
कर सुधार समिति (1991) – जिसने भारत की कर प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया
🤝 किसने साथ दिया?
• मनमोहन सिंह – उनकी समिति की सिफारिशों को लागू किया
• वित्त मंत्रालय – ने उनकी रिपोर्ट को आगे बढ़ाया
🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
1. कर सुधार समिति (दिसंबर 1991) की मुख्य सिफारिशें: Income Tax दरों में कटौती (उच्चतम सीमांत दर 97% से 40% की गई), Corporate Tax कम किया, सीमा शुल्क (Customs Duty) में भारी कमी (300% से घटाकर 65%), उत्पाद शुल्क (Excise Duty) को तर्कसंगत बनाया, MODVAT (अब CENVAT) की शुरुआत
2. नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (NIPFP) के संस्थापक निदेशक
3. पुस्तकें: "The Tax System in India: Evolution and Present Status", "Indian Tax Structure: An Overview"
4. विश्व बैंक और IMF के सलाहकार
5. मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के संस्थापक
27. सी. रंगराजन (1932-जीवित)
"RBI गवर्नर और वित्त आयोग अध्यक्ष"
पूरा नाम
चक्रवार्थी रंगराजन (Chakravarthi Rangarajan)
प्रसिद्धि
RBI गवर्नर (1992-1997) – उदारीकरण के दौर में RBI के प्रमुख
🤝 किसने साथ दिया?
• मनमोहन सिंह – उनके साथ मिलकर 1991-97 के सुधारों को लागू किया
🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
1. RBI गवर्नर के रूप में प्रमुख सुधार: Ad-hoc Treasury Bills को समाप्त किया – सरकार के स्वचालित उधार पर रोक, Ways and Means Advances (WMA) की शुरुआत, ब्याज दरों का विनियमन समाप्त (Deregulation), CRR और SLR में कमी – बैंकों के लिए अधिक ऋण देने योग्य धन, LERMS (Liberalised Exchange Rate Management System) – 1993 में द्वैध विनिमय दर प्रणाली
2. आत्मकथा: "Forks in the Road: My Days at RBI and Beyond" (2022)
3. 12वें वित्त आयोग के अध्यक्ष (2004-2009) — राज्यों के कर हिस्से में वृद्धि की सिफारिश, क्षैतिज असमानताओं को दूर करने के लिए समानीकरण दृष्टिकोण
4. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के अध्यक्ष
5. महत्वपूर्ण समितियाँ: वित्तीय समावेशन समिति (2006-08), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक समिति (2010), गरीबी मापन पद्धति की समीक्षा समिति (2014)
28. बिमल जालान (1941-जीवित)
"RBI गवर्नर (1997-2003)"
पूरा नाम
बिमल जालान (Bimal Jalan)
कार्यकाल
RBI गवर्नर: 22 नवंबर 1997 – 6 सितंबर 2003
🤝 किसने साथ दिया?
• भारत सरकार – तीन बार उन्हें RBI गवर्नर के रूप में फिर से नियुक्त किया
🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
1. RBI गवर्नर से पहले के महत्वपूर्ण पद: मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) – 1980 के दशक में, बैंकिंग सचिव (1985-1989), वित्त सचिव – वित्त मंत्रालय, योजना आयोग के सदस्य-सचिव, IMF और विश्व बैंक में भारत के कार्यकारी निदेशक
2. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के अध्यक्ष (1991-1992)
3. प्रमुख पुस्तकें: "India's Economic Crisis: The Way Ahead" (1991, Oxford University Press), "The Indian Economy: Problems and Prospects" (संपादित, 1993, Penguin), "India's Economic Policy: Preparing for the Twenty-first Century" (1996, Viking)
4. राज्यसभा सदस्य (27 अगस्त 2003 को नामित)
29. विजय केलकर (1932-जीवित)
"14वें वित्त आयोग के अध्यक्ष"
पूरा नाम
विजय केलकर (Vijay Kelkar)
प्रसिद्धि
14वें वित्त आयोग (2014) के अध्यक्ष
🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
1. 14वें वित्त आयोग की महत्वपूर्ण सिफारिशें (2014): केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 32% से बढ़ाकर 42% किया, विकेंद्रीकरण को बढ़ावा दिया, राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता
2. 13वें वित्त आयोग के अध्यक्ष पहले थे (2010-2014) – पहली बार कोई व्यक्ति दो वित्त आयोगों का अध्यक्ष बना
3. वित्त सचिव – भारत सरकार
4. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में सचिव
5. कर सुधार समिति के अध्यक्ष (2001-2002) – केलकर समिति के नाम से प्रसिद्ध (प्रत्यक्ष कर और अप्रत्यक्ष कर में सुधार)
30. जगदीश भगवती (1934-जीवित)
"व्यापार उदारीकरण के प्रबल समर्थक"
पूरा नाम
जगदीश नटवरलाल भगवती (Jagdish Natwarlal Bhagwati)
प्रसिद्धि
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सिद्धांतकार, भारत के आर्थिक सुधारों के प्रबल समर्थक
🤝 किसने साथ दिया?
• अरविंद पनगढ़िया – उनके सह-लेखक और सहयोगी
🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
1. प्रमुख पुस्तकें: "India: Planning for Industrialisation" (1968, पद्मा देसाई के साथ), "Why Growth Matters: How Economic Growth in India Reduced Poverty" (अरविंद पनगढ़िया के साथ), "Going Alone: The Case for Relaxed Reciprocity in Freeing Trade" (2002)
2. कोलंबिया विश्वविद्यालय में यूनिवर्सिटी प्रोफेसर (सबसे वरिष्ठ शैक्षणिक पद)
3. पुस्तक "India: Planning for Industrialisation" (1968) – 1991 के सुधारों से 23 साल पहले ही लाइसेंस राज और संरक्षणवाद की समस्याओं को उजागर किया
4. GATT के महानिदेशक आर्थर डंकेल के सलाहकार
5. पुरस्कार: पद्म विभूषण (2009) – भारत का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार
31. अरविंद पनगढ़िया (1952-जीवित)
"नीति आयोग के पहले उपाध्यक्ष"
पूरा नाम
अरविंद पनगढ़िया (Arvind Panagariya)
प्रसिद्धि
नीति आयोग के पहले उपाध्यक्ष (2015-2017)
🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
1. नीति आयोग के उपाध्यक्ष (जनवरी 2015 – अगस्त 2017) — योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग बनने के बाद पहले उपाध्यक्ष, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके अध्यक्ष थे
2. योजना आयोग की आलोचक – उन्होंने कहा था: "Planning has become our habit. We should break that habit"
3. कोलंबिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर – "जगदीश भगवती प्रोफेसर ऑफ इंडियन पॉलिटिकल इकॉनमी" पद पर
4. एशियाई विकास बैंक (ADB) के मुख्य अर्थशास्त्री रहे
5. प्रमुख पुस्तकें: "Why Growth Matters: How Economic Growth in India Reduced Poverty" (जगदीश भगवती के साथ), "India: The Emerging Giant" (2008)
32. पद्मा देसाई (1931-जीवित)
"योजना की आलोचक"
पूरा नाम
पद्मा देसाई (Padma Desai)
🤝 किसने साथ दिया?
• जगदीश भगवती – उनके सह-लेखक
🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
1. पुस्तक "India: Planning for Industrialisation" (1968) – जगदीश भगवती के साथ सह-लेखक — इस पुस्तक ने भारत की लाइसेंस राज और योजना प्रणाली की आलोचना की, पुस्तक का तर्क था कि "growth-first, efficiency-next strategy" गलत है – growth और efficiency को एक साथ अपनाना चाहिए
2. भारतीय योजना प्रणाली के प्रबल आलोचक
3. कोलंबिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर
4. सोवियत अर्थव्यवस्था और संक्रमण अर्थव्यवस्थाओं पर भी उनका महत्वपूर्ण कार्य है

⚔️ आलोचना और समर्थन – एक नज़र में

अर्थशास्त्रीकिसने आलोचना की?किसने समर्थन किया?
मनमोहन सिंहवामपंथी दल, संरक्षणवादी उद्योगपतिनरसिंह राव, सी. रंगराजन, चेलैया
जगदीश भगवतीमार्क्सवादी अर्थशास्त्री, गांधीवादीपनगढ़िया, विश्व बैंक, IMF
पद्मा देसाईयोजना आयोग के समर्थकभगवती, उदारीकरण समर्थक

📚 प्रमुख पुस्तकें

अर्थशास्त्रीपुस्तकवर्ष
मनमोहन सिंह"India's Export Trends"-
सी. रंगराजन"Forks in the Road: My Days at RBI"2022
बिमल जालान"India's Economic Crisis: The Way Ahead"1991
जगदीश भगवती"India: Planning for Industrialisation" (देसाई के साथ)1968
जगदीश भगवती"Why Growth Matters" (पनगढ़िया के साथ)-
अरविंद पनगढ़िया"India: The Emerging Giant"2008

✨ अतिरिक्त अत्यंत महत्वपूर्ण बातें (परीक्षा के लिए)

तथ्यविवरण
"नो पावर ऑन अर्थ" वाला भाषणमनमोहन सिंह ने 1991 के बजट भाषण में कहा था
दो वित्त आयोगों के अध्यक्षविजय केलकर – 13वें और 14वें दोनों के अध्यक्ष
"दिल्ली स्कूल का सुनहरा युग"सी. रंगराजन, जगदीश भगवती, पद्मा देसाई का समय
1991 से पहले ही सुधारों की भविष्यवाणीभगवती-देसाई (1968) ने की थी
भारत का सबसे लंबे समय तक RBI गवर्नरबिमल जालान (लगभग 6 वर्ष)
प्रथम गैर-आईएएस वित्त सचिवविजय केलकर
🎯 एक लाइन सारांश (परीक्षा के लिए यही याद रखो)

"मनमोहन सिंह ने 1991 में भारत को बचाया, चेलैया ने करों को सरल बनाया, रंगराजन ने RBI को नई दिशा दी, जालान ने मुद्रास्फीति पर नियंत्रण पाया, केलकर ने राज्यों को अधिक हिस्सा दिलाया, भगवती-देसाई ने 1968 में ही लाइसेंस राज की आलोचना कर दिखाई, और पनगढ़िया ने नीति आयोग की नींव रखी। ये सातों ही भारत के आर्थिक परिवर्तन के अग्रदूत हैं।"
📌 अब यह सूची पूर्णतः संपूर्ण है और परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है! 😊

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