निर्यात संवर्धन मिशन (EPM)

निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) 2025-26 | भारत सरकार

🚀 निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) Export Push 2025-26

वैश्विक व्यापार में बढ़ती चुनौतियों (अमेरिकी टैरिफ सहित) और MSME की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार की एकीकृत, डिजिटल एवं मिशन-आधारित रणनीति

✅ कैबिनेट मंजूरी: 12 नवंबर 2025 | अवधि: FY 2025-26 से FY 2030-31 तक
📌 एक नज़र में : निर्यात संवर्धन मिशन (EPM)
पुरानी योजनाओं (ब्याज समानीकरण योजना IES, बाजार पहुंच पहल MAI) का विलय कर बनाया गया, जो अब निर्यात प्रोत्साहन (वित्तीय) और निर्यात दिशा (गैर-वित्तीय) के तहत काम करता है।
कुल बजट ₹25,060 करोड़ (6 वर्षों हेतु)
लाभार्थी MSME, पहली बार निर्यात करने वाले, श्रम प्रधान क्षेत्र (टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स ज्वैलरी, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान)
क्रियान्वयन एजेंसी DGFT (पूर्णतः डिजिटल प्लेटफॉर्म)
मुख्य लक्ष्य सस्ता कर्ज, बाजार पहुंच, लॉजिस्टिक्स सहायता, वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना
🔧 EPM के दो मुख्य घटक
💰 निर्यात प्रोत्साहन (वित्तीय सहायता)

उद्देश्य: सस्ता और आसान कर्ज उपलब्ध कराना, विशेषकर MSME को।

  • ✨ ब्याज सब्सिडी (Interest Subvention): MSME निर्यातकों को प्री- व पोस्ट-शिपमेंट क्रेडिट पर 2.75% सब्सिडी। वार्षिक लाभ ₹50 लाख/फर्म तक।
  • 🛡️ बिना गारंटी लोन (Collateral Support): CGTMSE के साथ साझेदारी – माइक्रो/स्मॉल के लिए 85% तक, मीडियम के लिए 65% गारंटी कवर। प्रति फर्म ₹10 करोड़ तक।
✔ लाभ: बैंकों से आसान फंडिंग, कैश फ्लो में सुधार।
🌍 निर्यात दिशा (Niryat Disha) (गैर-वित्तीय सहायता)

उद्देश्य: नए बाजारों तक पहुंच, गुणवत्ता और ब्रांडिंग सहायता।

  • 📌 बाजार पहुंच सहायता (MAS): अंतर्राष्ट्रीय मेलों, बायर-सेलर मीट (BSM), प्रदर्शनियों के लिए ₹4,531 करोड़ का प्रावधान।
  • 🎯 प्राथमिकता वाले क्षेत्र: कृषि, हथकरघा, चमड़ा, खिलौने, दूरसंचार, रक्षा, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, कंस्ट्रक्शन आदि।
  • 📋 कोषांश में आरक्षण: प्रति कार्यक्रम में 35% सीटें MSME निर्यातकों के लिए आरक्षित।
  • गुणवत्ता प्रमाणन, पैकेजिंग सहायता और ब्रांड प्रमोशन भी शामिल।
💡 एक नज़र में: पुरानी योजनाओं का एकीकरण
✔ IES + MAI
ब्याज समानीकरण & बाजार पहुंच पहल अब EPM में समाहित
📦 ड्यूटी ड्रॉबैक
निर्यात पर लगे कस्टम/उत्पाद शुल्क की वापसी जारी
🤝 क्रेडिट गारंटी
MSME निर्यातकों के लिए ₹20,000 करोड़ अतिरिक्त सपोर्ट
🌐 अन्य सहायक उपाय (नीतिगत & RBI)
🏦 RBI राहत उपाय (नवंबर 2025)
  • विदेशी मुद्रा नियम (FEMA) में ढील – निर्यात भुगतान की समय सीमा 9 माह से बढ़ाकर 15 माह
  • निर्यात ऋण की अवधि बढ़ाई गई – 450 दिन तक
  • 1 सितंबर से 31 दिसंबर 2025 तक ऋण चुकौती पर मोहलत (कोविड जैसी स्थितियों के मद्देनजर)।
🤝 नए व्यापार समझौते
  • 🇮🇳-🇪🇺 भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता (FTA): 27 जनवरी 2026 को हस्ताक्षरित।
  • अन्य प्राथमिकता वाले देशों/ब्लॉकों के साथ वार्ता तेज।
  • इससे टैरिफ चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी एवं निर्यातकों को नए बाजार उपलब्ध होंगे।
🎯 MSME पर विशेष फोकस: EPM के तहत 35% बाजार पहुंच सीटें आरक्षित, बिना गारंटी लोन (CGTMSE कवर), और ब्याज सब्सिडी ₹50 लाख/फर्म सालाना। साथ ही DGFT का डिजिटल प्लेटफॉर्म आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाता है।

🏛️ कार्यान्वयन एजेंसी: महानिदेशालय विदेश व्यापार (DGFT) | डिजिटल पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण और लाभ

Comments