विदेशी अर्थशास्त्री पूरा विश्लेषण (भार
📊 प्रमुख विदेशी अर्थशास्त्री
पूरा विश्लेषण (भारतीय प्रशासन एवं विकास पर दृष्टि)
49. जॉन केनेथ गैलब्रेथ (John Kenneth Galbraith)
विवरण: कनाडा में जन्म, अमेरिकी नागरिक। भारत में अमेरिकी राजदूत (1961-63), भारतीय प्रशासन पर गहन लेखन।
• जवाहरलाल नेहरू – घनिष्ठ संबंध
• जॉन एफ. केनेडी – भारत में राजदूत नियुक्त किया
🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत-चीन युद्ध (1962) के दौरान राजनयिक भूमिका अत्यंत सक्रिय रही।
- प्रमुख पुस्तकें:
- "The Affluent Society" (1958) – धनी समाज की आलोचना
- "The New Industrial State" (1967) – बड़े निगमों का उदय
- "Indian Painting: Notes on Its History and Development" (1968)
- "A View from the Stands" (1986), "The Culture of Contentment" (1992)
- "Conventional Wisdom" (पारंपरिक ज्ञान) शब्द को लोकप्रिय बनाया।
- "Countervailing Power" (प्रतिसंतुलन शक्ति) – बड़े निगमों के मुकाबले संघों और उपभोक्ता समूहों की भूमिका।
- पुरस्कार: प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम (2000)।
50. गुन्नार मिर्डाल (Gunnar Myrdal)
प्रसिद्धि: 'एशियन ड्रामा: एन इंक्वायरी इनटू द पॉवर्टी ऑफ नेशंस' (1968) – दक्षिण एशिया की गरीबी का तीन खंडों में महाकाव्य अध्ययन।
🌟 योगदान एवं सिद्धांत
- "सॉफ्ट स्टेट" (Soft State) – जहाँ कानूनों का पालन न हो और भ्रष्टाचार आम हो।
- "Circular Causation" (चक्रीय कार्य-कारण) – गरीबी, शिक्षा की कमी और निवेश की कमी एक दूसरे को प्रबल करते हैं।
\( \text{निम्न आय} \rightarrow \text{निम्न शिक्षा} \rightarrow \text{निम्न निवेश} \rightarrow \text{निम्न आय} \) - नोबेल पुरस्कार (1974) – मौद्रिक सिद्धांत और आर्थिक उतार-चढ़ाव।
- अन्य पुस्तकें: "An American Dilemma" (1944) – अमेरिका में नस्लीय असमानता।
51. रग्नार नर्कसे (Ragnar Nurkse)
प्रसिद्धि: "हीन दुष्चक्र" (Vicious Circle of Poverty) सिद्धांत (1953) एवं "बैलेंस्ड ग्रोथ" के प्रस्तावक।
🔄 हीन दुष्चक्र (LaTeX प्रस्तुति)
आपूर्ति पक्ष:
\( \text{कम आय} \rightarrow \text{कम बचत} \rightarrow \text{कम निवेश} \rightarrow \text{कम उत्पादकता} \rightarrow \text{कम आय} \)
मांग पक्ष:
\( \text{कम आय} \rightarrow \text{कम क्रय शक्ति} \rightarrow \text{छोटा बाज़ार} \rightarrow \text{कम निवेश} \rightarrow \text{कम आय} \)
- प्रमुख पुस्तक: "Problems of Capital Formation in Underdeveloped Countries" (1953)
- "Disguised Unemployment" (प्रच्छन्न बेरोजगारी) – कृषि क्षेत्र में छिपी बेरोजगारी का विश्लेषण।
- कोलंबिया विश्वविद्यालय प्रोफेसर, संयुक्त राष्ट्र सलाहकार।
52. साइमन कुजनेट्स (Simon Kuznets)
कुजनेट्स वक्र (Kuznets Curve) – आय असमानता एवं आर्थिक विकास के बीच उल्टा U-आकार का संबंध (1955)।
- राष्ट्रीय आय मापन – अमेरिका की GDP प्रणाली विकसित करने में महती भूमिका।
- प्रमुख रचनाएँ: "National Income and Its Composition" (1941), "Economic Growth of Nations" (1971)
- NBER (National Bureau of Economic Research) के अध्यक्ष (1954-65)।
53. एडम स्मिथ – "आधुनिक अर्थशास्त्र के जनक"
"द वेल्थ ऑफ नेशंस" (1776) – अदृश्य हाथ, श्रम विभाजन, मुक्त व्यापार।
- "Invisible Hand" – बिना केंद्रीय नियंत्रण के बाजार स्वतः संतुलित होता है।
- उत्पादन के तीन कारक: श्रम, पूंजी, भूमि।
- पुस्तकें: "The Theory of Moral Sentiments" (1759) तथा "Wealth of Nations" (1776)।
54. डेविड रिकार्डो – "तुलनात्मक लाभ सिद्धांत"
तुलनात्मक लाभ (Comparative Advantage) – यदि कोई देश सब वस्तुएँ कुशलता से बनाता है, तब भी व्यापार लाभदायक होता है।
- प्रमुख पुस्तक: "On the Principles of Political Economy and Taxation" (1817)
- रिकार्डो का भू-कर सिद्धांत (Ricardian Rent Theory) – भूमि किराये का विश्लेषण।
- स्टॉक ब्रोकर से अर्थशास्त्री बने, अत्यधिक धनी।
55. जॉन मेनार्ड कीन्स – "समग्र मांग सिद्धांत"
जनरल थ्योरी (1936) – मंदी में सरकारी हस्तक्षेप, समग्र मांग (Aggregate Demand) ही रोजगार निर्धारक है।
- "The Economic Consequences of the Peace" (1919) – वर्साय संधि की आलोचना।
- "कीन्सियन क्रांति" – 20वीं सदी के अर्थशास्त्र की दिशा बदली।
56. जोसेफ शुम्पीटर – "सृजनात्मक विनाश" के जनक
Creative Destruction – पुराने उद्योग/तकनीक नष्ट होकर नवाचार (नए उत्पाद, विधियाँ, बाज़ार) से विकास होता है।
- उद्यमी (Entrepreneur) नवाचार के 5 प्रकार: नया उत्पाद, नई उत्पादन विधि, नया बाजार, कच्चे माल का नया स्रोत, उद्योग का नया संगठन।
- प्रमुख पुस्तकें: "Theory of Economic Development" (1911/1934), "Capitalism, Socialism and Democracy" (1942)
- हार्वर्ड प्रोफेसर, ऑस्ट्रिया के वित्त मंत्री (1919-20)।
57. अल्फ्रेड मार्शल – उपयोगिता एवं मांग का नियम
"Principles of Economics" (1890) – 40 वर्षों तक अर्थशास्त्र की सबसे प्रभावशाली पाठ्यपुस्तक। मूल्य का सिद्धांत: आपूर्ति और मांग दोनों मूल्य निर्धारित करते हैं।
- उपभोक्ता अधिशेष (Consumer Surplus) एवं मांग की लोच (Elasticity of Demand) की अवधारणा।
- कैम्ब्रिज स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के संस्थापक, जॉन मेनार्ड कीन्स के शिक्षक।
📚 प्रमुख पुस्तकें (एक नज़र में)
✨ अतिरिक्त महत्वपूर्ण बातें (परीक्षा के लिए)
"एडम स्मिथ ने 'अदृश्य हाथ' दिखाया, रिकार्डो ने 'तुलनात्मक लाभ' बताया, मार्शल ने आपूर्ति-मांग सिखाई, शुम्पीटर ने 'सृजनात्मक विनाश' बताया, कीन्स ने मंदी में हस्तक्षेप सिखाया, नर्कसे ने 'हीन दुष्चक्र' समझाया, कुजनेट्स ने 'असमानता का वक्र' बनाया, मिर्डाल ने 'एशियन ड्रामा' लिखा, और गैलब्रेथ ने भारत में राजदूत के रूप में दोनों संस्कृतियों को जोड़ा। ये नौ विदेशी अर्थशास्त्री भारत की समझ के लिए भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने भारतीय अर्थशास्त्री।"
© विश्लेषण में समस्त तथ्य संरक्षित – परीक्षा उपयोग हेतु प्रामाणिक सारांश
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