कल्याण अर्थशास्त्र एवं सामाजिक कल्याण फलन के स्तंभ
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कल्याण अर्थशास्त्र एवं सामाजिक कल्याण फलन के स्तंभ
परिचय: इतालवी अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, लॉज़ेन स्कूल के प्रमुख। उन्होंने अर्थशास्त्र को समाजशास्त्र से जोड़ा।
सिद्धांत: पेरेटो दक्षता (Pareto Optimality) और कल्याण अर्थशास्त्र के पहले व दूसरे मूल प्रमेय (First & Second Welfare Theorems)।
पुस्तक: "Manual of Political Economy" (1906 – इतालवी; 1909 – फ्रेंच)।
वर्ष: 1906।
- सभी व्यक्ति तर्कसंगत (rational) हैं और अपनी उपयोगिता अधिकतम करना चाहते हैं।
- उपयोगिता को अंतर्वैयक्तिक रूप से तुलनीय (interpersonally comparable) नहीं माना जाता।
- कोई भी सामाजिक स्थिति बिना किसी को हानि पहुँचाए बदली जा सकती है (या नहीं)।
- प्राथमिकताएँ पूर्ण (complete) और सकर्मक (transitive) होती हैं।
- पेरेटो मानदंड केवल अस्वीकार करने (reject) बताता है – स्वीकार करने का नहीं।
- पेरेटो दक्षता (Pareto Efficiency): एक स्थिति ऐसी कि किसी एक व्यक्ति को बेहतर बनाए बिना दूसरे को बदतर बनाना असंभव हो। यानी सभी पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समाप्त हो चुके हैं।
- पहला कल्याण प्रमेय (First Welfare Theorem): पूर्ण प्रतिस्पर्धी संतुलन (competitive equilibrium) पेरेटो दक्ष होता है – बाजार अपने आप दक्ष परिणाम लाता है (बिना किसी हस्तक्षेप के)।
- दूसरा कल्याण प्रमेय (Second Welfare Theorem): किसी भी पेरेटो दक्ष बिंदु को एक प्रतिस्पर्धी संतुलन के रूप में प्राप्त किया जा सकता है, बशर्ते प्रारंभिक बंदोबस्ती (initial endowments) का पुनर्वितरण (lump-sum transfers) कर दिया जाए।
- पेरेटो मानदंड सामाजिक कल्याण की तुलना के लिए कमजोर (weak) मानदंड है – कई स्थितियों की तुलना नहीं कर सकता।
- पेरेटो सिद्धांत (Pareto Principle): यदि कम से कम एक व्यक्ति बेहतर हो और कोई भी बदतर न हो, तो नई स्थिति सामाजिक रूप से बेहतर है।
आगे बढ़ाने वाले: अब्राम बर्गसन (Bergson) और पॉल सैमुएलसन (Samuelson): सामाजिक कल्याण फलन (SWF) को औपचारिक रूप दिया। केनेथ एरो (Arrow): असंभवता प्रमेय में पेरेटो सिद्धांत को एक शर्त के रूप में रखा। जॉन हिक्स और निकोलस काल्डोर (Hicks & Kaldor): पेरेटो मानदंड को क्षतिपूर्ति सिद्धांत से विस्तारित किया।
आलोचना (Criticism): बर्गसन-सैमुएलसन (Bergson-Samuelson): पेरेटो मानदंड अधूरा है – यह केवल सर्वसम्मति (unanimity) पर आधारित है, जबकि समाज में संघर्ष होता है। सीतोव्स्की (Scitovsky): पेरेटो मानदंड संतुलन में वापसी की जाँच नहीं करता – इसलिए "सीतोव्स्की विरोधाभास" उत्पन्न होता है। अमर्त्य सेन (Amartya Sen): पेरेटो सिद्धांत अकाल (famine) और असमानता को सही ठहरा सकता है – उदाहरण: एक व्यक्ति के पास सब कुछ और बाकी के पास कुछ नहीं, फिर भी पेरेटो दक्ष हो सकता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Points): PYQ: "पहला कल्याण प्रमेय क्या कहता है?" → प्रतिस्पर्धी संतुलन पेरेटो दक्ष होता है। PYQ: "दूसरा कल्याण प्रमेय की सार्थकता क्या है?" → यह पुनर्वितरण (redistribution) को उचित ठहराता है – बाजार को छोड़ो, लेकिन प्रारंभिक बंदोबस्ती बदल दो। ट्रिक: "Pareto → P for Perfect competition gives Pareto efficiency" ।
पेरेटो दक्षता की शर्त (उपभोग में): MRS¹_xy = MRS²_xy = ... = MRS^n_xy (सभी उपभोक्ताओं की प्रतिस्थापन की सीमांत दरें बराबर)
पेरेटो दक्षता की शर्त (उत्पादन में): MRTS¹_LK = MRTS²_LK = ... = MRTS^m_LK
उत्पाद-मिश्रण दक्षता: MRS_xy = MRT_xy
Numerical Question (उदाहरण): Q: दो उपभोक्ता (A और B) और दो वस्तुएँ (X, Y) हैं। A का MRS_xy = 2 है, B का MRS_xy = 3 है। क्या यह पेरेटो दक्ष है? यदि नहीं, तो कैसे दक्ष बनाएँ?
हल: 1. पेरेटो दक्षता के लिए MRS_A = MRS_B होना चाहिए। यहाँ 2 ≠ 3, अतः अदक्ष (inefficient) है। 2. क्योंकि A को X से अधिक कीमत (कम Y देना) लगती है (MRS=2), B को X से कम (ज्यादा Y देना) लगती है। व्यापार से दोनों लाभान्वित होंगे। 3. नए संतुलन में MRS_A = MRS_B हो जाएगा।
(a) पूर्ण प्रतिस्पर्धा में (b) बाहरीताओं (externalities) की उपस्थिति में (c) शून्य लेनदेन लागत पर (d) उत्तल प्राथमिकताओं में
उत्तर: (b) बाहरीताओं की उपस्थिति में
| स्तंभ A | स्तंभ B |
|---|---|
| First Welfare Theorem | प्रतिस्पर्धी संतुलन → पेरेटो दक्ष |
| Second Welfare Theorem | पेरेटो दक्ष बिंदु → पुनर्वितरण से संतुलन |
परिचय: हंगेरियन मूल के ब्रिटिश अर्थशास्त्री, कीन्स के सहयोगी, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रोफेसर। पोस्ट-कीनेसियन स्कूल के नेता।
सिद्धांत: काल्डोर-हिक्स क्षतिपूर्ति मानदंड (Kaldor-Hicks Compensation Criterion)।
पुस्तक: "Welfare Propositions in Economics and Interpersonal Comparisons of Utility" – Economic Journal (1939)।
वर्ष: 1939 (हिक्स के साथ समकालीन)।
- पेरेटो मानदंड बहुत कमजोर है – अधिकांश नीतियाँ किसी को लाभ और किसी को हानि पहुँचाती हैं।
- क्षतिपूर्ति (compensation) सैद्धांतिक रूप से संभव है – भले ही वास्तव में दी न गई हो।
- उपयोगिता की अंतर्वैयक्तिक तुलना (interpersonal comparison) की कोई आवश्यकता नहीं।
- व्यक्तियों की प्राथमिकताएँ तर्कसंगत और स्थिर हैं।
- लेनदेन लागत (transaction cost) शून्य मानी गई है (परोक्ष रूप से)।
- काल्डोर-हिक्स मानदंड: एक नीति सामाजिक कल्याण में सुधार करती है, यदि लाभान्वित होने वाले लोग सैद्धांतिक रूप से हानि उठाने वालों को इतना भुगतान कर सकें कि बाद वाले स्वेच्छा से परिवर्तन स्वीकार कर लें (भले ही वास्तविक भुगतान न हो)।
- यह संभावित क्षतिपूर्ति (potential compensation) पर आधारित है – वास्तविक (actual) क्षतिपूर्ति आवश्यक नहीं।
- यदि लाभ इतना अधिक है कि हानि की भरपाई कर सके, तो नीति कल्याणकारी है – भले ही भरपाई न की गई हो।
- काल्डोर-हिक्स दक्षता (Kaldor-Hicks Efficiency): वह स्थिति जहाँ कोई और परिवर्तन संभव न हो जो लाभ को हानि से अधिक बना सके – यह वास्तविक दुनिया की नीतियों (जैसे प्रदूषण कर, अधिग्रहण) के लिए उपयोगी है।
- यह लागत-लाभ विश्लेषण (Cost-Benefit Analysis) का आधार है: यदि कुल लाभ > कुल हानि, तो परियोजना स्वीकार करो।
आगे बढ़ाने वाले: टिबोर सीतोव्स्की (Scitovsky): "सीतोव्स्की विरोधाभास" दिखाया। रिचर्ड पॉज़्नर (Posner): कानून और अर्थशास्त्र में लोकप्रिय बनाया। अमर्त्य सेन (Sen): सीमाओं पर चर्चा।
आलोचना: सीतोव्स्की: असंगति (Scitovsky Paradox)। सैमुएलसन: सकर्मकता का उल्लंघन। लिटिल (Little): वितरणीय न्याय को नजरअंदाज करता है। अमर्त्य सेन: पूर्ण अधिकारों का उल्लंघन।
परीक्षा तथ्य: PYQ: "काल्डोर-हिक्स मानदंड में क्षतिपूर्ति की क्या प्रकृति है?" → संभावित (potential), वास्तविक नहीं। ट्रिक: "Kaldor-Hicks = Hypothetical compensation" ।
Numerical Example: एक सड़क निर्माण से A को 5000 का लाभ, B को 3000 की हानि। कुल लाभ > हानि (5000>3000) → स्वीकार्य है (सैद्धांतिक क्षतिपूर्ति संभव)।
परिचय: ब्रिटिश अर्थशास्त्री, नोबेल पुरस्कार (1972), सामान्य संतुलन और कल्याण अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ।
सिद्धांत: काल्डोर-हिक्स क्षतिपूर्ति मानदंड – हिक्स ने काल्डोर से स्वतंत्र रूप से समान विचार प्रस्तुत किए।
पुस्तक: "The Foundations of Welfare Economics" – Economic Journal (1939)।
वर्ष: 1939 (काल्डोर के लेख के ठीक बाद)।
- पेरेटो मानदंड अपर्याप्त है।
- सैद्धांतिक क्षतिपूर्ति की संभावना।
- अंतर्वैयक्तिक उपयोगिता तुलना की आवश्यकता नहीं।
- हिक्स का विशेष जोर: "यदि हारने वाले स्वयं विजेताओं को रिश्वत देकर परिवर्तन को रोकना नहीं चाहते, तो परिवर्तन कल्याणकारी है।"
- हिक्स मानदंड: एक परिवर्तन कल्याणकारी है यदि हानि उठाने वाले लोग लाभान्वित होने वालों को सैद्धांतिक रूप से भुगतान करके परिवर्तन को रोकना नहीं चाहेंगे।
- काल्डोर और हिक्स मानदंड व्युत्क्रम हैं।
- हिक्स ने क्षतिपूर्ति भिन्नता (CV) और समतुल्य भिन्नता (EV) की अवधारणाएँ दीं।
आगे बढ़ाने वाले: काल्डोर, सीतोव्स्की, पॉज़्नर।
आलोचना: हिक्स ने स्वीकार किया कि वितरणीय न्याय को अनदेखा करता है, सैमुएलसन एवं बर्गसन की आपत्तियाँ।
परीक्षा तथ्य: PYQ: हिक्स मानदंड काल्डोर से कैसे भिन्न? (काल्डोर: लाभान्वित→हानि; हिक्स: हानि उठाने वाले→लाभान्वित)। ट्रिक: "Kaldor – Winners compensate Losers; Hicks – Losers bribe Winners" ।
Numerical Example (CV & EV): कीमत घटने से उपभोक्ता को लाभ। CV: नई कीमतों पर पुरानी उपयोगिता बनाए रखने हेतु आय में परिवर्तन। EV: पुरानी कीमतों पर नई उपयोगिता देने हेतु आय में परिवर्तन।
परिचय: हंगेरियन मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर।
सिद्धांत: सीतोव्स्की दोहरा मानदंड (Scitovsky Double Criterion / Scitovsky Paradox Resolution)।
पुस्तक: "A Note on Welfare Propositions in Economics" – Review of Economic Studies (1941) – और "The Political Economy of Consumer Sovereignty" (1942)।
वर्ष: 1941।
- काल्डोर-हिक्स मानदंड असतत परिवर्तनों के लिए सकर्मकता का उल्लंघन करता है।
- सामाजिक प्राथमिकताएँ सकर्मक होनी चाहिए।
- एक नीति से दूसरी और फिर वापस लौटने पर विरोधाभास हो सकता है।
- समाधान के लिए मानदंड को दो बार (आगे और पीछे) जाँचना आवश्यक है।
- सीतोव्स्की विरोधाभास (Scitovsky Paradox): एक स्थिति S1 से S2 काल्डोर-हिक्स के अनुसार बेहतर और S2 से S1 भी बेहतर → साइकिल।
- दोहरा मानदंड: एक परिवर्तन कल्याणकारी है यदि और केवल यदि (i) काल्डोर मानदंड संतुष्ट हो और (ii) हिक्स मानदंड भी संतुष्ट हो।
- यह सकर्मकता सुनिश्चित करता है।
आगे बढ़ाने वाले: इयान लिटिल (Little Criterion), सैमुएलसन, चिपमैन।
आलोचना: लिटिल: वितरण को अनदेखा करता है; सैमुएलसन: अंतर्वैयक्तिक तुलना से बचता है; मिशान: पूर्ण समाधान नहीं।
परीक्षा तथ्य: PYQ: "सीतोव्स्की विरोधाभास क्या है?" → काल्डोर-हिक्स से A>B और B>A दोनों सत्य। ट्रिक: Scitovsky = S for both sides (आगे और पीछे दोनों देखो)।
Numerical Example (Paradox): S1→S2: A:+100, B:-80 (पास); S2→S1: A:-80, B:+100 (पास) → विरोधाभास; दोहरा मानदंड अपर्याप्त, वितरण मानदंड चाहिए।
परिचय: रूसी मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री, सामाजिक कल्याण फलन (SWF) के जनक।
सिद्धांत: बर्गसन-सैमुएलसन सामाजिक कल्याण फलन (Bergson-Samuelson Social Welfare Function)।
पुस्तक: "A Reformulation of Certain Aspects of Welfare Economics" – Quarterly Journal of Economics (1938)।
वर्ष: 1938।
- सामाजिक कल्याण व्यक्तियों की उपयोगिताओं पर निर्भर करता है।
- उपयोगिता की अंतर्वैयक्तिक तुलना (interpersonal comparison) संभव है – नैतिक निर्णय आवश्यक।
- समाज नैतिक रूप से विभिन्न वितरणों को रैंक कर सकता है।
- प्राथमिकताएँ स्थिर एवं सकर्मक।
- बर्गसन-सैमुएलसन SWF = W(U1, U2, …, Un) एक वास्तविक-मूल्य फलन।
- W बढ़ता है यदि किसी की उपयोगिता बढ़े और किसी की न घटे (पेरेटो सिद्धांत सम्मिलित)।
- यह वितरणीय न्याय, समता आदि को स्पष्ट नैतिक भार देता है।
- बिना अंतर्वैयक्तिक तुलना के SWF असंभव – इसलिए इसे माना।
- SWF के विभिन्न रूप: उपयोगितावादी, रॉल्सियन, आदि।
आगे बढ़ाने वाले: पॉल सैमुएलसन, केनेथ एरो, अमर्त्य सेन।
आलोचना: एरो असंभवता प्रमेय: बर्गसन-सैमुएलसन SWF को व्यक्तिगत प्राथमिकताओं से लोकतांत्रिक रूप से नहीं निकाला जा सकता। सेन: यह नैतिक निर्णयों को तो स्पष्ट करता है, लेकिन "पूर्व निर्धारित" नैतिकता पर निर्भर।
परीक्षा तथ्य: PYQ: "बर्गसन-सैमुएलसन SWF क्यों आवश्यक है?" → पेरेटो की तुलना में अधिक पूर्ण रैंकिंग देता है।
परिचय: अमेरिकी अर्थशास्त्री, नोबेल पुरस्कार (1970), नव-शास्त्रीय संश्लेषण के जनक।
सिद्धांत: बर्गसन-सैमुएलसन SWF, प्रकट प्राथमिकता, सार्वजनिक वस्तुएँ।
पुस्तक: "Foundations of Economic Analysis" (1947) ; "Economics" (1948)।
वर्ष: 1947 (SWF का औपचारिक विकास)।
- समाज कल्याण फलन एक सामूहिक चुनाव नियम है।
- SWF सभी व्यक्तिगत उपयोगिताओं पर निर्भर करता है।
- अंतर्वैयक्तिक उपयोगिता तुलना मान्य है (नैतिक रूप से)।
- दक्षता और वितरण को एक साथ देखा जा सकता है।
- SWF का उपयोग कर सामाजिक इष्टतम बिंदु (अधिकतम W) चुन सकते हैं, जो पेरेटो सेट पर होगा।
- सैमुएलसन ने सार्वजनिक वस्तुओं के लिए समष्टि संतुलन शर्त दी (∑ MRS = MRT)।
- उन्होंने काल्डोर-हिक्स की सीमाओं को दिखाया तथा बताया कि SWF ही पूर्ण मानदंड है।
- प्रकट प्राथमिकता सिद्धांत में कल्याण संबंधी व्याख्या दी।
आगे बढ़ाने वाले: केनेथ एरो, अमर्त्य सेन, हल वेरियन।
आलोचना: एरो: SWF का निर्माण व्यक्तिगत प्राथमिकताओं से लोकतांत्रिक रूप से करना असंभव (असंभवता प्रमेय)। सेन: SWF में अधिकार-आधारित जानकारी छूट सकती है।
परीक्षा तथ्य: PYQ: "सैमुएलसन के अनुसार सार्वजनिक वस्तु की दक्ष शर्त क्या है?" → ∑ MRS = MRT। ट्रिक: Samuelson → SWF + सार्वजनिक वस्तु समीकरण।
परिचय: अमेरिकी अर्थशास्त्री, नोबेल पुरस्कार (1972), सामाजिक चुनाव सिद्धांत के जनक।
सिद्धांत: एरो की असंभवता प्रमेय (Arrow's Impossibility Theorem)।
पुस्तक: "Social Choice and Individual Values" (1951)।
वर्ष: 1951।
- व्यक्तिगत प्राथमिकताएँ तर्कसंगत (पूर्ण, सकर्मक)।
- सामाजिक प्राथमिकता एकत्र करने के लिए न्यायसंगत शर्तें (अप्रतिबंधित क्षेत्र, पेरेटो सिद्धांत, असंबद्ध विकल्पों से स्वतंत्रता, अहस्तक्षेप नहीं, लोकतंत्र)।
- कोई तानाशाह नहीं होना चाहिए।
- असंभवता प्रमेय: कम से कम तीन विकल्प होने पर कोई भी सामाजिक कल्याण फलन (या सामूहिक नियम) एक साथ सभी वांछनीय शर्तों को संतुष्ट नहीं कर सकता – तानाशाही या असंगति अपरिहार्य है।
- इससे पता चलता है कि बर्गसन-सैमुएलसन SWF को व्यक्तिगत प्राथमिकताओं से लोकतांत्रिक रूप से नहीं बनाया जा सकता।
- सामाजिक कल्याण के लिए किसी न किसी प्रकार का मूल्य निर्णय (अंतर्वैयक्तिक तुलना) आवश्यक है।
आगे बढ़ाने वाले: अमर्त्य सेन, गिबार्ड-सैटरथवेट, पटनायक।
आलोचना: सेन ने शर्तों में ढील देकर संभाव्यता दिखाई। व्यवहारिक अनुप्रयोगों में अक्सर तीन विकल्पों की बाधा उत्पन्न होती है।
परीक्षा तथ्य: PYQ: "एरो की असंभवता प्रमेय में कौन सी शर्तें हैं?" → U, P, I, D (non-dictatorship)। ट्रिक: "A → Arrow = Impossibility (कोई आदर्श SWF नहीं)।"
परिचय: अमेरिकी राजनीतिक दार्शनिक, न्याय के सिद्धांत के प्रणेता।
सिद्धांत: रॉल्सियन सामाजिक कल्याण फलन (Rawlsian SWF) – मैक्सिमिन सिद्धांत।
पुस्तक: "A Theory of Justice" (1971)।
वर्ष: 1971।
- अज्ञानता का पर्दा (veil of ignorance) – कोई नहीं जानता कि समाज में उसकी स्थिति क्या होगी।
- मूलभूत स्वतंत्रताएँ समान हों।
- असमानताएँ केवल तभी स्वीकार्य जब वे सबसे गरीब को लाभ पहुँचाएँ।
- रॉल्सियन SWF: W = min(U₁, U₂, …, Uₙ) → सामाजिक कल्याण = सबसे बदतर व्यक्ति की उपयोगिता।
- वितरण को प्राथमिकता, दक्षता से ऊपर न्याय।
- अंतर्वैयक्तिक तुलना को स्पष्ट रूप से शामिल करता है।
- यह "लीपफ्रॉग" (सबसे गरीब को पहले ऊपर उठाना) को प्रोत्साहित करता है।
आगे बढ़ाने वाले: अमर्त्य सेन, थॉमस पिकेटी।
आलोचना: उपयोगितावादी: यह दक्षता की अनदेखी करता है, अत्यधिक जोखिम-विमुखता। सेन: केवल सबसे गरीब पर ध्यान देने से मध्यम और अमीरों के उपयोगिता लाभ को अनदेखा करता है।
परीक्षा तथ्य: PYQ: "रॉल्स का मैक्सिमिन सिद्धांत क्या है?" → सामाजिक कल्याण = न्यूनतम उपयोगिता वाले व्यक्ति की उपयोगिता। ट्रिक: Rawls = Maximin (maximum of minimum)।
परिचय: भारतीय अर्थशास्त्री, नोबेल पुरस्कार (1998), क्षमता दृष्टिकोण (Capability Approach) के प्रणेता।
सिद्धांत: क्षमता दृष्टिकोण, सामाजिक चुनाव सिद्धांत, पेरेटो उदारवादी विरोधाभास (Liberal Paradox) ।
पुस्तक: "Collective Choice and Social Welfare" (1970), "Commodities and Capabilities" (1985)।
वर्ष: 1970 (प्रमुख कार्य)।
- कल्याण केवल वस्तुओं या उपयोगिता में नहीं, बल्कि "कार्य-क्षमताओं" (functionings and capabilities) में है।
- व्यक्ति की स्वतंत्रता और अवसर महत्वपूर्ण हैं।
- पेरेटो सिद्धांत और न्यूनतम उदारवाद (minimal liberalism) में टकराव संभव।
- पेरेटो उदारवादी विरोधाभास (Pareto Liberal Paradox): यदि पेरेटो सिद्धांत और न्यूनतम उदारवाद (हर व्यक्ति को कम से कम एक सामाजिक मामले में अधिकार) दोनों मानें, तो असंगति उत्पन्न होती है।
- क्षमता दृष्टिकोण: कल्याण → व्यक्ति क्या कर सकता है या क्या बन सकता है (स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वतंत्रता)।
- उपयोगिता और वस्तुओं से परे जाने का आह्वान।
- भुखमरी, असमानता के विश्लेषण में एंडोमेंट और एंटाइटलमेंट महत्वपूर्ण।
आगे बढ़ाने वाले: मार्था नुसबाम, जेम्स फोस्टर।
आलोचना: क्षमताओं की सूची तय करना कठिन; व्यावहारिक मापन में जटिलता।
परीक्षा तथ्य: PYQ: "सेन के पेरेटो उदारवादी विरोधाभास का क्या अर्थ है?" → व्यक्तिगत अधिकार और पेरेटो दक्षता परस्पर विरोधी हो सकते हैं। ट्रिक: Sen → Capability ≠ Utility।
परिचय: ब्रिटिश अर्थशास्त्री, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, कल्याण अर्थशास्त्र और विकास अर्थशास्त्र में योगदान।
सिद्धांत: लिटिल मानदंड (Little Criterion) – क्षतिपूर्ति मानदंड + वितरणीय न्याय की शर्त।
पुस्तक: "A Critique of Welfare Economics" (1950, 1957)।
वर्ष: 1950 (पहला संस्करण)।
- काल्डोर-हिक्स और सीतोव्स्की मानदंड वितरण को अनदेखा करते हैं।
- सामाजिक कल्याण के लिए दक्षता के साथ-साथ वितरण संबंधी निर्णय आवश्यक है।
- अंतर्वैयक्तिक तुलना को उचित ठहराया जा सकता है।
- लिटिल मानदंड: एक परिवर्तन कल्याणकारी है यदि (i) काल्डोर-हिक्स मानदंड संतुष्ट हो (क्षतिपूर्ति संभव), (ii) वितरण बदतर न हो (या वास्तव में वितरण में सुधार हो), और (iii) क्षतिपूर्ति के बाद भी कोई विरोधाभास न हो (सीतोव्स्की जाँच पास करे)।
- यदि लाभान्वित लोग अमीर हैं और हानि गरीबों को तो भले ही क्षतिपूर्ति संभव हो, परिवर्तन अस्वीकार्य।
- लिटिल ने सुझाया कि सरकार वितरण पर स्पष्ट नैतिक रुख अपनाए।
आगे बढ़ाने वाले: जेम्स मीड, अमर्त्य सेन।
आलोचना: वितरणीय निर्णय का कोई "वैज्ञानिक" आधार नहीं; विवादास्पद। व्यावहारिक रूप से कठिन।
परीक्षा तथ्य: PYQ: "लिटिल मानदंड, काल्डोर-हिक्स से कैसे भिन्न है?" → लिटिल में वितरण की स्पष्ट शर्त जोड़ी गई।
परिचय: अमेरिकी अर्थशास्त्री, नोबेल पुरस्कार (1986), सार्वजनिक विकल्प सिद्धांत (Public Choice) के संस्थापक।
सिद्धांत: संवैधानिक राजनीतिक अर्थशास्त्र, सर्वसम्मति-आधारित कल्याण।
पुस्तक: "The Calculus of Consent" (1962, गॉर्डन टुलॉक के साथ)।
वर्ष: 1962।
- व्यक्ति स्वार्थी, तर्कसंगत और राजनीति में भी अपनी उपयोगिता अधिकतम करता है।
- सरकार कोई नैतिक संस्था नहीं, बल्कि व्यक्तियों का समूह।
- कल्याण अर्थशास्त्र को प्रक्रिया-आधारित (process-based) देखना चाहिए।
- बुकानन के अनुसार, सामाजिक कल्याण "सर्वसम्मति" (unanimity) पर आधारित होना चाहिए – लोकतंत्र के संवैधानिक नियम।
- कोई भी नीति तभी स्वीकार्य यदि सभी को लाभ हो (पेरेटो सुधार) या सर्वसम्मति हो।
- बुकानन ने SWF को अस्वीकार किया क्योंकि यह अंतर्वैयक्तिक तुलना थोपता है।
- उन्होंने "राजनीतिक बाजार" और "संवैधानिक चरण" में कल्याण सुधार देखा।
- क्षतिपूर्ति वास्तविक होनी चाहिए, न कि केवल संभावित।
आगे बढ़ाने वाले: गॉर्डन टुलॉक, एलिनोर ओस्ट्रोम।
आलोचना: पूर्ण सर्वसम्मति अव्यावहारिक; यह स्थिति-परिवर्तन को लगभग असंभव बना देता है। वितरण संबंधी निर्णयों को टाल देता है।
परीक्षा तथ्य: PYQ: "बुकानन का सार्वजनिक विकल्प सिद्धांत कल्याण अर्थशास्त्र को कैसे चुनौती देता है?" → सरकार को एक परोपकारी तानाशाह मानने के बजाय बाजार की तरह देखता है।
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