गरीबी मापन और कल्याण अर्थशास्त्री

गरीबी मापन और कल्याण अर्थशास्त्री: पूरा विश्लेषण

📊 गरीबी मापन और कल्याण अर्थशास्त्री

पूरा विश्लेषण — प्रोफाइल, सिद्धांत, समर्थन, आलोचना और परीक्षा उपयोगी तथ्य

15. वी.एम. दांडेकर (1925–2017)

"कैलोरी आधारित गरीबी रेखा के जनक" — विनायक माधव दांडेकर
पूरा नाम: विनायक माधव दांडेकर
उपनाम: "भारतीय गरीबी मापन के पितामह"
मुख्य सिद्धांत: कैलोरी आधारित गरीबी रेखा (1971) – एन. रथ के साथ मिलकर
प्रसिद्ध उद्धरण: "Poverty is not just lack of income, it's lack of capability to meet basic needs"

🤝 किसने साथ दिया?
· एन. रथ – उनके सह-लेखक और सहयोगी
· भारत सरकार ने उनके अनुमान को गरीबी मापन का आधार बनाया

⚡ किसने आलोचना की?
· बी.एस. मिन्हास – कहा कि केवल कैलोरी आधारित माप अपर्याप्त है
· अमर्त्य सेन – कहा कि पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा को भी शामिल करना चाहिए
· तेंदुलकर समिति (2009) – ने कैलोरी आधारित माप को खारिज कर दिया

🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य (परीक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी)

· दांडेकर-रथ गरीबी अनुमान (1971) के अनुसार:
  ✅ ग्रामीण गरीबी रेखा: 2700 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रति दिन
  ✅ शहरी गरीबी रेखा: 2250 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रति दिन
  ✅ 1971 में ग्रामीण गरीबी 46.14% और शहरी गरीबी 41.22% थी
· पुस्तक: "Poverty in India" (1971, एन. रथ के साथ)
· गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (GIPE), पुणे के निदेशक
· उनके नाम पर दांडेकर पुरस्कार (Dandekar Award) – गरीबी अनुसंधान के लिए

16. एन. रथ (1929–2017)

"दांडेकर-रथ गरीबी अनुमान के सह-लेखक" — निलकंठ रथ
पूरा नाम: निलकंठ रथ
मुख्य सिद्धांत: गरीबी का कैलोरी-आधारित माप (वी.एम. दांडेकर के साथ, 1971)

🤝 किसने साथ दिया?
· वी.एम. दांडेकर – उनके सह-लेखक और सहयोगी
· योजना आयोग – उनके अनुमानों का उपयोग किया

🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य

· दांडेकर-रथ गरीबी अनुमान – भारत में पहला वैज्ञानिक गरीबी मापन प्रयास
· पुस्तक: "Poverty in India" (1971, वी.एम. दांडेकर के साथ) – यह पुस्तक योजना आयोग के लिए तैयार की गई थी
· इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट (ISI) में शोधकर्ता
· गोखले इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर

17. बी.एस. मिन्हास (1929–2005)

"NSS डेटा विश्लेषक और गरीबी मापनकर्ता" — बंसी लाल सूद मिन्हास
पूरा नाम: बंसी लाल सूद मिन्हास
मुख्य सिद्धांत: NSS (राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण) डेटा के आधार पर गरीबी मापन

🤝 किसने साथ दिया?
· योजना आयोग (1977-79) – उनके कार्यकाल में सदस्य रहे
· भारत सरकार – उनकी गरीबी मापन पद्धति को अपनाया

⚡ किसने आलोचना की?
· दांडेकर – मिन्हास के अनुमानों को बहुत कम (underestimation) बताया
· अमर्त्य सेन – कहा कि केवल NSS डेटा पर निर्भर रहना अपर्याप्त है

🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य

· योजना आयोग के सदस्य (1977-79)
· दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (DSE) के प्रोफेसर और निदेशक (1971-78)
· भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI), कोलकाता के अध्यक्ष
· उन्होंने दिखाया कि योजना अवधि (1956-61 से 1973-74) में गरीबी 47% से 33% हुई
· पद्म भूषण (1987)
· पुस्तक: "Planning and the Poor" (1974)

18. पी.डी. ओझा (जन्म-मृत्यु अज्ञात)

"1960 के दशक के गरीबी अनुमानकर्ता"
पूरा नाम: पी.डी. ओझा
मुख्य सिद्धांत: 1960 के दशक में गरीबी अनुमान – योजना आयोग के लिए

🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य

· योजना आयोग के लिए गरीबी अनुमान (1960 के दशक)
· उनके अनुमान के अनुसार, 1960 के दशक में गरीबी 40% से अधिक थी
· यह अनुमान बाद के योजनाकारों (दांडेकर, मिन्हास) के लिए आधार बना
· NSS डेटा का उपयोग करने वाले शुरुआती विशेषज्ञों में से एक

19. एस.आर. हाशिम

"गरीबी एवं बेरोजगारी विशेषज्ञ"
पूरा नाम: एस.आर. हाशिम
मुख्य सिद्धांत: गरीबी और बेरोजगारी का अंतर-संबंध

🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य

· योजना आयोग के सदस्य
· राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) पर उनके विशेष कार्य रहे
· गरीबी उन्मूलन और रोजगार सृजन के बीच संबंधों पर गहन अध्ययन
· बेरोजगारी अनुमान पद्धति के विकास में योगदान

20. के. रंगनाथन

"गरीबी मापन पद्धति विशेषज्ञ"
पूरा नाम: के. रंगनाथन
मुख्य सिद्धांत: गरीबी मापन पद्धति (Methodology of Poverty Measurement)

🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य

· गरीबी मापन पद्धति पर गहन अध्ययन
· योजना आयोग के सलाहकार
· भारतीय आर्थिक सेवाओं में उनका महत्वपूर्ण योगदान
· उनकी पद्धति ने बाद के गरीबी सर्वेक्षणों का मार्गदर्शन किया

21. अमर्त्य सेन (1933-जीवित)

"क्षमता दृष्टिकोण के जनक, नोबेल पुरस्कार विजेता" — अमर्त्य कुमार सेन
उपनाम: "भारत का मानव विकास दूत" (The Human Development Ambassador of India)
मुख्य सिद्धांत: क्षमता दृष्टिकोण (Capability Approach) – गरीबी केवल आय की कमी नहीं, बल्कि क्षमताओं की कमी है
नोबेल पुरस्कार: 1998 (कल्याण अर्थशास्त्र में)

🤝 किसने समर्थन किया?
· UNDP – ने उनके क्षमता दृष्टिकोण को मानव विकास सूचकांक (HDI) का आधार बनाया
· विश्व बैंक और IMF ने उनके विचारों को अपनाया
· भारत सरकार ने उनके क्षमता दृष्टिकोण को गरीबी मापन में शामिल किया

⚡ किसने आलोचना की?
· पारंपरिक अर्थशास्त्री – कहते हैं कि उनका मॉडल बहुत व्यापक (too broad) है, आंकड़ों में ढालना मुश्किल है
· पी. स्ट्रीटन (Paul Streeton) ने कहा कि यह नीति निर्माण के लिए बहुत अमूर्त है

🌟 अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य (परीक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी)

· क्षमता दृष्टिकोण (Capability Approach) के तीन मुख्य स्तंभ:
1. जीवन जीने की क्षमता (Capability) – शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार
2. अवसर (Opportunity) – सामाजिक और आर्थिक अवसरों तक पहुंच
3. स्वतंत्रता (Freedom) – निर्णय लेने की आज़ादी
· प्रमुख पुस्तकें:
📘 "Poverty and Famines: An Essay on Entitlement and Deprivation" (1981) – अकाल पर गहन अध्ययन
📗 "Development as Freedom" (1999) – विकास और स्वतंत्रता पर उनकी प्रसिद्ध पुस्तक
📙 "The Idea of Justice" (2009)
📕 "Collective Choice and Social Welfare" (1970)
· ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज – प्रोफेसर
· हार्वर्ड विश्वविद्यालय – प्रोफेसर (1988-2004)
· थॉमस डब्ल्यू. लैमोंट विश्वविद्यालय प्रोफेसर – हार्वर्ड में उनकी कुर्सी
· भारत रत्न (1999) – भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार
· बांग्लादेश, ब्रिटेन, चिली, चीन, भारत सहित कई देशों के विश्वविद्यालयों से डॉक्टरेट
· उनके "Entitlement Approach" के अनुसार – अकाल केवल भोजन की कमी से नहीं, बल्कि भोजन खरीदने की क्षमता (वेतन, रोज़गार) में कमी से होता है

⚔️ आलोचना और समर्थन – एक नज़र में

अर्थशास्त्रीकिसने आलोचना की?किसने समर्थन किया?
दांडेकरमिन्हास, अमर्त्य सेन, तेंदुलकर समितिएन. रथ, भारत सरकार
मिन्हासदांडेकर, अमर्त्य सेनयोजना आयोग
अमर्त्य सेनपारंपरिक अर्थशास्त्री, पी. स्ट्रीटनUNDP, विश्व बैंक, भारत सरकार

📚 प्रमुख पुस्तकें

अर्थशास्त्रीपुस्तकवर्ष
वी.एम. दांडेकर"Poverty in India" (एन. रथ के साथ)1971
बी.एस. मिन्हास"Planning and the Poor"1974
अमर्त्य सेन"Poverty and Famines"1981
अमर्त्य सेन"Development as Freedom"1999
अमर्त्य सेन"The Idea of Justice"2009

✨ अतिरिक्त अत्यंत महत्वपूर्ण बातें (परीक्षा के लिए)

तथ्यविवरण
पहला वैज्ञानिक गरीबी मापनदांडेकर-रथ (1971) – कैलोरी आधारित
"गरीबी रेखा" की शुरुआतदांडेकर और रथ ने की
"क्षमता दृष्टिकोण"अमर्त्य सेन (Capability Approach)
"अकाल पर शोध"अमर्त्य सेन ने बंगाल अकाल (1943) का विश्लेषण किया
"विकास ही स्वतंत्रता है"अमर्त्य सेन का प्रसिद्ध नारा (Development as Freedom)
पहले भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्रीअमर्त्य सेन (1998)
दांडेकर पुरस्कारगरीबी अनुसंधान के लिए प्रतिवर्ष दिया जाता है
🎯 एक लाइन सारांश (परीक्षा के लिए यही याद रखो)

"दांडेकर-रथ ने कैलोरी से गरीबी नापी, मिन्हास ने NSS डेटा से आगे बढ़ाई राह, और अमर्त्य सेन ने साबित किया – गरीबी सिर्फ रोटी की कमी नहीं, बल्कि क्षमताओं की भी कमी है। सेन को 1998 का नोबेल मिला, और दुनिया ने भारत के इस मानवतावादी विचार को सलाम किया।"

😊 पूरा विश्लेषण — सभी तथ्य, आलोचना, समर्थन एवं अतिरिक्त जानकारी सुरक्षित। परीक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी।

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